पाती

प्रिये,

कैसी हो, आजकल कहाँ हो?किसे अपनी दास्तान सुनाये ।कोई सुने तो कहें।अतीत के गलियारे ना जाने कितनी यादों को अपने आँचल मे समेटे हैं।आज इनके झरोखे यकायक खुलकर मन के तारों को झंकृत कर रहे हैं।याद है किशोरावस्था के वे दिन ,जब हम मिले थे।हमारा मिलना, बतियाना ,हमारे गानों को सुनना मित्रता के एक नये रिश्ते मे बँध जाना ,उम्र के इस दहलीज पर भी विकल कर जाता है।

कुछ ही दिनों में तुम महज मित्र नहीं रही ,बल्कि चाँद हो गयी ,जिसे देखकर हम खिल उठते थे।तुम्हें देखे बिना हमें चैन नहीं होता था।पता नहीं तुम मेरी भावनाओं को समझ पायी या नहीं अथवा हम तुम्हें व्यक्त कर पाये या नहीं?लेकिन तुम जब भी मिलती हमेशा मेरी कर्तव्यों को याद दिलाती ।कहती “पढना है तुम्हें बहुत आगे बढना है तुम्हें और मै तुम्हें निहारते हुए सब कुछ भूल जाता।तुमने एक बार गंभीरतापूर्वक कहा था कि प्रेम आकर्षण मे डूबकर अपने लक्ष्यों से विमुख हो जाना अच्छी बात नहीं है।आज सोचता हूँ तो वर्षों पहले उस किशोरावस्था मे भी तुम कितनी संयत और समझदार थी।हमारे कर्तव्यों को लेकर तुम हमसे ज्यादा गंभीर थी।तुमने मुझसे कभी प्रेम भरे शब्द नहीं कहे ,कोई प्रेम पत्र नहीं लिखा ,बल्कि तरह तरह के पुस्तकों को ही हम साझा करते रहे और मै उसमे प्रेम के मायने ढूूंढता रहा।तुम्हारा खूबसूरत गंभीर चेहरा ,असीम प्रतिभा से हम मंत्रमुग्ध हो जाते।हमे भविष्य मे कुछ कर गुजरने की महत्वाकांक्षा तुम्हें मुझसे हमारी नजर से बहुत दूर ले गयी ।बिलगाव की धूल अब तक आँखों मे चुभती रही हैं।लेकिन, तुम्हारे हर प्रेरणादायक शब्द आज भी हमारे कानो मे गूंज रहे हैं।उन शब्दों का मै शुक्रिया भी अदा नहीं कर पाया ।आखिरकार हमारा पवित्र रिश्ता कभी किसी औपचारिकता का मोहताज कहाँ रहा?तुम कहाँ हो?तुम हमेशा हमारे दिल के करीब रही ।तुम्हारी मधु जैसी मिष्टी भरी आवाज को कभी भूला नहीं पाऊंगा।हमारे बीच प्रेम का संबंध हमें किसी सामाजिक नाम तक तो नहीं पहुंचा सका ।लेकिन मेरे लिए तुम्हारा वह चमकता चेहरा तुम्हारी बातें आज भी मेरे लिए रौशनियों के नये द्वार खोलते रहते हैं।

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