अविर्भाव💐

अपने जन्म और अपने पूर्वजों के बारे में हमने जो कुछ सुना वो इस प्रकार है ःमुझे बताया गया कि मेरा जन्म धनबाद मे छठ पूजा के पहले अर्ध्य के दिन हुआ था।बडे होने पर वह जन्मपत्री भी मेरे हाथ लग गया जिसमें इस बात का प्रमाण है।हमारे पापाजीस्व.त्रिभुवन नारायण लाल अपने बच्चों के जन्म के मूहूर्त, समय और तिथि आदि के विषय मे विशेष रूप से सजग और सावधान थे।वे स्वयं पोथी पत्रा के ज्ञाता थे।उसी के आधार पर वे बाद मे जन्म पत्रिका भी बनवाते थे।

पूर्वजः हमारा पैतृक घर जोगसर (ग्वालटोली)भागलपुर मे था।हमारे दादा दो भाई थे ।हमारे दादाजी का नाम स्व. गिरिवर नारायण लाल और दादी का नाम बिंदेश्वरी देवी था ।मेरे पापाजी अकेले भाई व एक बहन थी। हमारी बुआ का नाम नारायणी था।हमारे पापाजी के शैशव काल मे ही दादाजी के गुजर जाने के बाद चचेरे दादाजी ने उनका लालन पालन किया एवं पढाई मे मदद की ।हमारे पापाजी ने टी.एन.बी.कालेज, भागलपुर से दो विषयों में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की थी।उनका हस्तलेख बेहद खूबसूरत होता था।हमारी माँ सावित्री देवी बरौनी के निकट गडहरा निवासी एक पुलिस दारोगा स्व.ईश्वरी प्रसाद की बेटी थी।माँ बताती थी कि हमारे नानाजी उन्हें बहुत मानते थे।चूंकि हमारी माँ के बाद ही उन्हें बेटा हुआ था।उस जमाने मे मैट्रिक पास की थी पर,हमलोगों ने उनका कोई सर्टिफिकेट नहीं देखा था।

भागलपुर का पैतृक मकान पर हमारे चचेरे चाचाओं ने ऐन केन प्रकारेण हडप लिया ।हमारे पापाजी अपने हिस्से को लेकर अपने चचेरे भाइयों से कभी कोई विवाद या झगडा नहीं किया।सेवा निवृत्ति के पूर्व ही मुंगेर मे उन्होंने अपना घर बना लिया।

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