स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवनकाल मे धर,दर्शन ,संस्कृति ,शिक्षा, भ्रमण, समाज तथा राष्ट्रनिर्माण आदि विषयों पर अनगिनत पत्र लिखे ।श्री लाला गोविंद सहाय के जरिए अलवर के युवाओं के नाम लिखा गया ऐसा ही एक प्रेरक पत्रः

💐तुम लोग जितने भी हो ,सभी योग्य हो।💐

आबू पर्वत,30अप्रैल 1891

प्रिय गोविंद सहाय,

उस ब्राह्मण बालक का उपनयन -संस्कार क्या तुम करा चुके ?क्या संस्कृत पढ रहे हो?कितनी प्रगति हुई है?आशा है कि प्रथम भाग तो अवश्य ही समाप्त कर चुके होगे।……..तुम्हारी शिव पूजा तो अच्छी तरह से चल रही होगी?यदि नहीं तो करने का प्रयास करो ।तुमलोग पहले भगवान के राज्य का अन्वेषण करो,ऐसा करने पर सब कुछ स्वतः ही प्राप्त कर सकोगे।भगवान का अनुसरण करने पर तुम जो कुछ चाहोगे, वह मिल जाएगा ।दोनों कमांडर साहबों को मेरी आंतरिक श्रद्धा निवेदन करना।उच्च पदाधिकारी होते हुए भी मुझ जैसे गरीब-फकीर के साथ उन दोनों ने अत्यंत सदय व्यवहार किया।

धर्म का रहस्य आचरण से जाना जा सकता है, व्यर्थ के मतवादों से नहीं।सच्चा बनना तथा सच्चा वर्ताव करना ,इसमे ही समग्र धर्म निहित है।जो केवल प्रभु, प्रभु की रट लगाता है, वह नहीं।किंतु, जो उस परम् पिता की इच्छानुसार कार्य करता है, वही धार्मिक है।अलवर निवासी युवकों ,तुमलोग जितने भी हो सभी योग्य हो और मैं आशा करता हूँ कि तुममें से अनेक व्यक्ति अविलंब ही समाज के भूषण तथा जन्मभूमि के कल्याण के कारण बन सकेंगे।”

आशीर्वादक

विवेकानंद

पुनश्च ःयदि कभी-कभी तुमको संसार के थोडे बहुत धक्के खाने भी पडे तो उनसे विचलित न होना ,मूहूर्त भर मे वह दूर हो जाएगा तथा सारी स्थिति पुनः ठीक हो जायेगी।

साभार ःपत्रावली -स्वामी विवेकानंद

प्रकाशकःस्वामी ब्रह्मास्थानंद

अध्यक्ष, रामकृष्ण मठ नागपुर।

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