वे सघर्ष के दिन💐

दिसंबर 1985 मे कई प्रतियोगिता परीक्षा मे असफल हो गया।हमारे अनुज ने एकमात्र साक्षात्कार जिसका आवेदन पत्र हमारे द्वारा तैयार किया गया मे सफलता प्राप्त कर ली ।जाहिर है कि इतने परिश्रम के बाद भी असफल होने से मै काफी व्यथित हो गया था।मै बुरी तरह निराश था।पटना में हमारे संगीत शौक एवं गुनगुनाने की आदत के विरूद्ध काफी शिकायत की गई।पापा जी ने पटना छोडकर मुंगेर वापस लौटने का आदेश दिया।फिर सारे सामान ,भारी भारी किताबों को उठाकर मुंगेर लेकर लौट आया।व्यथित मन से भटकते हुए गंगा के किनारे कष्टहरणी घाट पहुंचा।गंगा नदी के किनारे काफी देर बैठने के बाद नरसिंह बाबू, ज्योतिषाचार्य के घर शास्त्रीनगर चले गये संयोग से उनसे मुलाकात हो गई।हमारे कुछ कहने के पहले ही उन्होंने पूछ लिया कि मै क्यूँ दुःखी हूँ।हमारे द्वारा पूरी बात सुनाई गई।नरसिंह बाबू ने हमसे जन्मदिन और जन्मस्थान की जानकारी प्राप्त कर हमारी कुंडली तैयार कर दिया और कहा कि जीवन जैसे जैसे खुलता जाता है ,उसे उसी रूप मे लेना चाहिए।उन्होंने आगे कहा,”अपने भाग्य को स्वीकार करो और जीवन में आगे बढो ।तुम्हारी तकदीर मे क्या क्या बनना लिखा है ये अभी स्पष्ट नहीं है ।लेकिन, सही समय पर वो सामने आ जायेगा ।पिछली असफलता को भूल जाओ। क्रमशः……

4 thoughts on “वे सघर्ष के दिन💐

  1. सत्य सर👍👍 आपने जिस मनोस्थिति का वर्णन किया है वो हर उस व्यक्ति की कहानी है जीवन की जो संघर्षरत है | ज़ब हम असफल होते हैं तो जो मनोदशा होती है वो किसी से व्यक्त भी नहीं कर पाते क्योंकि उसको वही व्यक्ति जान पाता है जो इन सभी मनोस्थितियों से गुजरता है ऐसे में कोई भी व्यक्ति प्रेरित करें तो मानसिक संबल मिलता है क्योंकि उस समय हम निराश तो होते हैं लेकिन हारते नहीं संघर्ष में |

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    1. धन्यवाद एवं दिल से आभार, आदरणीया ।हमारे पूज्य गुरुदेव के आज्ञानुसार अभी बहुत कुछ लिखना शेष है।अपनी मनोस्थिति को शब्दों में व्यक्त करने मे बहुत मुश्किल हो रही है।आपकी भाषा मे जितनी पकड है उतनी हमारी नहीं हो पायी है।आपकी समीक्षात्मक टिप्पणी से हमें काफी ऊर्जा प्राप्त हुई है।तहे दिल से आभार🙏

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      1. स्वागत सर 🙏🙏
        सर आप बहुत अच्छा लिखते हैं और आपकी लेखनी से हमेशा सीखने को मिलता है हमें और भाषा तो मात्र माध्यम होती है भाव व्यक्त करने का |सभी सीखने के दौर में शामिल होते हैं सर और वह दौर जीवनपर्यन्त चलता है सभी का |

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