हे दयानिधे ! रथ रोको अब,क्यों प्रलय की तैयारी है ।ये बिना शस्त्र का युद्ध है जो,महाभारत से भी भारी है ।कितने परिचित कितने अपने,कितने आखिर यूँ ही चले गए ।जिन हाथों में दौलत-संबल,सब क्रूर काल से छले गए ।हे राघव-माधव-मृत्युंजय,पिंघलो ये अर्ज हमारी है ।ये बिना शस्त्र का युद्ध है जो,महाभारत से भी भारी है ।।🙏 सुप्रभात🙏

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