भ्रष्टाचार उन्मूलन मे सूचना का अधिकार अधिनियम की भूमिका।

भ्रष्टाचार शब्द ‘भ्रष्ट’ तथा ‘आचार’ दो शब्दों से मिलकर बना है ।’भ्रष्टाचार’का सामान्य अर्थ है–निकृष्ट कोटि का आचरण करना।अर्थात जब मनुष्य अपने शारिरिक ,मानसिक एवं आर्थिक बाहुबल का दुरूपयोग करता है तथा सामूहिक दायित्व को भूलकर व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सरकारी नियमों एवं नैतिक मर्यादा का उल्लंघन करके गलत लाभ उठाता है तब उसका आचरण ‘भ्रष्टाचार’ कहलाता है।

  आज के भौतिकवादी युग मे अयोग्य मनुष्य बिना कठिन परिश्रम किए रातों रात अधिकाधिक सुख-सुविधाओं का उपभोग एवं उच्च सामाजिक, आर्थिक हैसियत प्राप्त करना चाहता है।इसके लिए वह नैतिक मर्यादा को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार एवं गलत तरीके अपनाकर धन कमाने के अंधे दौड़ मे शामिल हो जाता है।इस प्रकार समाज, देश व विश्व मे भ्रष्टाचार की जडें फैलती जा रही है।बेईमानी, चोरबाजारी, रिश्वतखोरी जैसी अनेक सामाजिक बुराईयां भ्रष्टाचार को जन्म दे रही है।सामाजिक, प्रशासनिक एवं राजनैतिक पदों, अधिकारों का दुरुपयोग भ्रष्टाचार को बढावा दे रही है।हर भ्रष्ट व्यक्ति अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित व मजबूत कर लेना चाहता है।इसके लिए वह अनैतिक व भ्रष्ट तरीकें अपनाकर समाज, राष्ट्र एवं मानवता का भी अहित करने से नहीं हिचकिता है। आज  हमारे देश की अधिकांश व्यवस्था भ्रष्टाचार का शिकार हो चुकी है।अधिकांश राजनैतिक व प्रशासनिक ढाँचा भ्रष्टाचार मे आकंठ डूबी हुई है।भ्रष्टाचार ने अपनी जडें पूरे समाज में फैला ली है।समाज का हर वर्ग इससे बुरी तरह प्रभावित नजर आ रहा है।इसी कारण भ्रष्टाचार ने एक गंभीर व विकराल समस्या का रूप धारण कर लिया आ। स्पष्ट है कि ‘भ्रष्टाचार’ एक सामाजिक बुराई है।सरकार अथवा उसके द्वारा निर्मित कानूनो से ‘भ्रष्टाचार’ का पूर्ण उन्मूलन संभव नहीं है।दृढ इच्छा शक्ति के द्वारा अपने अंदर सदाचार सृजित कर ही भ्रष्टाचार का उन्मूलन संभव है। सरकार इस बुराई को सरकारी तंत्र से दूर करने के लिए कई कडे कदम उठाए गए हैं।ऐसे कानून बनाए गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार को कम करने मे काफी मदद मिली  है।इन कानूनों में ‘सूचना का अधिकार अधिनियम’एक मील का पत्थर साबित हुए हैं।अब यह मान्य एवं स्थापित तथ्य है कि गोपनीयता भ्रष्टाचार का एक प्रमुख स्त्रोत है।इसलिए सरकारी एवं अन्य सार्वजनिक तंत्रों मे पारदर्शिता लाकर भ्रष्टाचार को दूर करने का प्रयास किया जा सकता है।प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सरकार द्वारा जो कार्य किए जाते हैं वह जनकल्याण की भावना एवं लोकहित मे किए जाते हैं।सीमित संसाधनों से अधिकतम लाभ आम जनता को पहुंचाने का सरकारी ध्येय रहता है।लेकिन सरकारी तंत्रों मे अधिकारों का दुरूपयोग करने की प्रवृत्ति ,लालफीताशाही एवं मनमानी करने के चलते हमें लोकनिधि का दुरुपयोग एवं असावधानी पूर्वक खर्च किए जाने के गलत दृष्टांत प्रायः देखने को मिलते हैं।इसलिए आवश्यक है कि सरकारी कार्यों के हर स्तर पर पारदर्शिता बरती जाये।इससे लोकनिधि का उपयोग सही ढंग से होगा साथ ही पारदर्शिता से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकेगा।

भ्रष्टाचार उन्मूलन मे सूचना का अधिकार अधिनियम की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है, जो निम्नलिखित है :-1.यह अधिनियम देश के नागरिकों के हाथ में शक्तिशाली अस्त्र प्रदान करता है, जिससे कि सरकारी कार्यालयो मे उपलब्ध सूचनाएं एवं दस्तावेज आसानी से प्राप्त किए जा सके।2.यह अधिनियम सरकारी कार्यालयों के विभिन्न स्तरो पर सम्पादित होने वाले क्रियाकलापों मे खुलापन एवं पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। 3.सरकारी योजनाओं का चयन, क्रियान्वयन ,अनुश्रवण एवं मूल्यांकन सहित हर स्तर पर आम जनता को स सहभागिता आवश्यक है।इस अधिनियम के अन्तर्गत जानकारी प्राप्त कर आम जनता योजनाओं के संशोधन, परिवर्तन का सुझाव देकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सकते हैं।जिसके लाभप्रद परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। 4. जब सरकारी कार्यकलापों मे गोपनीयता नहीं रहेगी और पूर्ण पारदर्शिता रहेगी तो निश्चित रूप से भ्रष्टाचार मे कमी आयेगी।आम नागरिकों को सरकारी कार्यकलापों के बारे में सूचना का अधिकार रहने से सरकारी तंत्र भी गलत करने से विरत रहते हैं। 5. प्रजातंत्र मे सरकारी कार्य किसी एक व्यक्ति या कुछ व्यक्तियों तक निहित नहीं होते हैं।इसलिए उच्च स्तर से निम्न स्तर तक का शासन आम जनता के प्रति जबाबदेह होता है।जनता को यह जानने का हक होता है कि उसकी सरकार उनके लिए क्या कर रही है।इस अधिनियम के तहत अधिकार मिलने से लोक प्राधिकारों को वे नियमित रूप से जबाबदेह बना सकते हैं। 6. जिस प्रकार स्वतंत्रता और अधिकार आपस मे जुड़े हुए हैं, ठीक उसी प्रकार सुशासन और सूचना का अधिकार का पारस्परिक संबंध है।सुशासन का मतलब है लोगों के लिए ऐसी नीतियां, योजनाएं बनाना और उसे क्रियान्वित करना जो न्यायसंगत ,पारदर्शी, भेदभावरहित ,सामाजिक रूप से संवेदनशील और जनसहभागिता जैसे मूल्यों से संपन्न हो तथा मुख्य रूप से लोगों के प्रति जबाबदेह हो ।यह अधिनियम सुशासन की प्राप्ति के लिए उपयुक्त वातावरण बनाता है। 7. यह अधिनियम सामान्य सूचना उपलब्ध कराने एवं संवेदनशील सूचना गोपनीय रखने में संतुलन कायम रखता है।

आम जनता को अँधेरे मे रखकर अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पक्षपात करना और लोकनिधि का दुरुपयोग कर गलत लाभ उठाना अब बीते दिनों की बात होगी जिसमें’सूचना का अधिकार’अधिनियम की भूमिका प्रमुख होगी।ःहमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से।🙏🌹🙏🌹🙏

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