हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से🙏

श्रीगुरू:शरणम् आज आदमी ने बाहरी तौर पर बहुत बड़ी-बड़ी शिक्षाएं ग्रहण कर ली हैं। इसलिए वह बहुत ऊँचा तर्कवादी बन गया है। हर बात के पीछे क्यों लगा देना यह तर्कवाद ही तो है। तर्क से किसी को निरुत्तर तो किया जा सकता है मगर तर्क कभी भी किसी प्रश्न का उत्तर नही बन सकता है। सत्य को देखने की अलग अलग दृष्टियाँ हैं। इसलिए अपने को तर्कों में न उलझाकर सत्य को स्वीकार कर लेना ज्यादा श्रेष्ठ है। तर्क करने की अपेक्षा जिज्ञासा करना ज्यादा श्रेष्ठ है। तर्क मतलब आप गलत में सही और जिज्ञासा मतलब दूसरे के सत्य को जानने की इच्छा। जीवन में कई विवादों की वजह केवल और केवल तर्क है। तर्क का रास्ता नर्क की ओर जाता है और समर्पण का स्वर्ग की ओर। अन्याय, अत्याचार और अनीति से लड़ना भगवान श्री कृष्ण के जीवन से सीखें। आदमी सबका विरोध करता है मगर दो जगहों पर यह विरोध का सामर्थ्य खो बैठता है। पहला जब विरोध अपनों का करना पड़े और दूसरा जब विरोध किसी सामर्थ्यवान, शक्तिवान का करना पड़े। श्री कृष्ण का जीवन तो देखिये। उन्होंने अनीति के खिलाफ सबसे अधिक अपनों का और सर्व सामर्थ्यवानों का ही विरोध किया। सात वर्ष की आयु में इन्द्र को ही चुनौती दे डाली और उसके व्यर्थाभिमान का नाश किया। अपने ही कुल के लोग जब कुमार्ग पर चलने लगे तो बिना किसी संकोच व मोह के उनका परित्याग कर दिया। अत: अन्याय, अत्याचार और अनीति का विरोध ही श्री कृष्ण की सच्चा अनुसरण होगा। अन्याय का विरोध करना ही होगा, चाहे सामने कोई अपना हो अथवा कोई साधन संपन्न ही क्यों न हो।

जे गुर चरण रेनु सिर धरही।
ते जनु सकल बिभव बस करही।।
मोहि सम यहु अनुभयेऊ न दूजे।
सबु पायऊ रज पावनि पूजे।।

सीताराम चरण रति मोरे।
अनुदिन बढ़ऊ अनुग्रह तोरे।।

श्री सदगुरुदेव भगवान की‌ जय हो। 🙏🙏

श्री सीताराम जी महाराज की‌ जय हो। 🙏🙏

श्री कनक भवन में शुशोभित बिहारी बिहारिणी जू सरकार की‌* जय हो। 🙏🙏

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s