हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से🙏🏼

🌹 मनसा वाचा कर्मणा🌹
“कथनी-करनी”
रेडियो पर कोई शायर एक शेर कह रहा था- उल्फत के इस बाजार में मैं अक्सर ठगा गया,सब बेचते कुछ और हैं, तौलते कुछ और हैं।मानव जीवन की यह त्रासदी हर युग में रही है।कथनी और करनी का अंतर हमेशा रहा है।कम या ज्यादा यह बस परिस्थिति पर निर्भर है।
भारतीय परंपरा में शब्द को ब्रह्म कहा गया है, क्योंकि यह ईश्वर और जीव को एक श्रंखला में बांधने का काम करता है। एक शब्द,जो मुंह से निकलता है, वह पूरे ब्रह्मांड में गूंजता रहता है। लेकिन उसकी कीमत तभी होती है, जब कथनी का सार हो। इसलिए मनीषियों ने मौन को बेहतर बताया है। इसका आशय यह नहीं था कि आप हमेशा चुप ही रहें, बल्कि जो भी कहें, वह माप-तौलकर। और जो कहें, वह आपके अपने आचरण में भी दिखे।हम अक्सर नेताओं को एक-दूसरे पर करनी-कथनी में अंतर के आरोप लगाते देखते हैं, लेकिन याद रखें,कथनी और करनी का अंतर केवल जिम्मेदार पदों पर रहने वालों में नहीं, बल्कि आम आदमी में भी दिखता है।आप घर में अपने बच्चों के सामने जो भी कह रहे होते हैं, वह कर नहीं रहे होते।
एक महात्मा ने अपने आगंतुकों से पूछा-इस विश्व में किन दो चीजों के बीच सबसे ज्यादा दूरी है? पास बैठे लोगों में से किसी ने कहा- धरती से चांद की, किसी ने कहा- मध्यलोक से सिदधलोक की; तो किसी ने कहा अमुक स्थल से अमुक स्थान तक की,पर गुरुदेव की मुस्कुराहट कुछ और ही कह रही थी।सबकी जिज्ञासा शांत करते हुए उन्होंने कहा, इस दुनिया में सबसे अधिक दूरी है, सुख और शांति के बीच की। वह दूरी है जीभ और जीवन,वचन और कर्म के बीच की।
प्रवीण कुमार।🌹🙏🌹

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