मेरी आँखों में आँसू आ गए ।यदि मै मुसलमान हो गया हूँ, तो अपने घर कैसे लौटूंगा?मै जानता था कि हमारा परिवार खासकर हमारी दादी पुराने खयालात की थी ।हमारे पापा जी के कोई मुसलमान मित्र हमारे घर आते थे तो उनके जाने के बाद हमारे पूरे घर की सफाई धुलाई होती थी।यदि दादी को पता चलेगा तो मुझे घर अंदर प्रवेश करने नहीं देगी।अब तो मुझे परिवार से अलग कहीं मुसलमान के मुहल्ले में रहना पडेगा और उनके जैसे कपडे पहनना पडेगा।इत्यादि मै सोच सोचकर रोता रहा ।हमारे प्रिय मित्र श्यामदेव ,मुझे जब भी याद आता है तो मेरे सामने एक बडे भाई का चित्र उभर कर सामने आ जाता है।वह गहरे साँवले रंग का हमसे लम्बा लडका था और उम्र मे हमसे बडा ही था।उसे पता चला तो उसने सलमा को डाँटा क्यूंकि वह उसी के मुहल्ले की थी ,और मुझे बहुत प्यार से समझाया ।पर, हमारे आँसू रूक नहीं रहे थे ।तभी शिक्षक कक्षा में आये तो उन्होंने पूछा कि मै क्यूं रो रहा हूँ? और किसी बच्चे ने कुछ नहीं बोला पर श्यामदेव ने सारी कहानी सुना दी।टीचर गंभीर हो गये और सलमा को डाँटा “यह भी कोई मजाक है? फिर मेरी ओर मुडे ,”कलमा पढने से कोई मुसलमान हो जाता है क्या? स्वामी रामकृष्ण परमहंस ,महात्मा गांधी भी ने अपनी प्रार्थना मे कुरान की आयतें पढी थी,तो क्या वे मुसलमान हो गये ?तुम रोना बंद करो ।हम कल सलमा को गीता पढा देंगे ,देखते हैं उससे वह हिन्दू बन जाती है या नहीं?मैने किसी प्रकार स्वयं को संभाला ।किंतु, घर आकर इस बात की चर्चा अब तक किसी से नहीं की।💐

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