वर्ष 2021

वर्ष 2021 विदा होने को है ।आँखें बंद कर सोचता हूँ तो जेहन में इस शहर में बिताए गए सफर एक दरिया सा बह जाता है।हमें इस शहर में रहते हुए 36 वर्ष से भी ज्यादा समय हो गये ।सिविल सेवा एवं अन्य प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने के साथ जिंदगी का सफर उस समय प्रारंभ हुआ जब हमारी शादी भी नहीं हुई और कायस्थों मे एक कहावत प्रचलित थी कि “नौकरी नहीं तो छोकरी नहीं”।और आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं कि ईश्वर और शुभचिंतकों का जितना धन्यवाद करें कम ही होगा। हाँ, इस वर्ष एक बेहद अफसोस और उदासी है कि इस साल हमने अनमोल धरोहर को खो दिया जो वर्ष 1988 से 2021 तक हमारे सुख-दुख के दिनों में हर वक्त साथ रहे।अचानक उनका चले जाना सहसा विश्वास ही नहीं हुआ और आज भी विश्वास नहीं हो रहा है कि हमारे परिवार, समाज ने एक अनमोल रत्न को खो दिया है।आज भी कभी कभी ऐसा लगता है कि कोई दूसरी खबर आयेगी और इस बुरी खबर को झूठ साबित कर देगी। इतनी कम उम्र में दो बच्चों को छोड़कर अचानक चले जाने से ज्यादा ही दुख हो रहा है ।हमारी कितनी रातें आँसुओं से तकिए को भिंगोती रही और पता नहीं आगे कितने दिनों तक विलाप करते हुए जीवन कटेगा। अत्यंत उत्साही, कर्मठ,सौम्य, सक्रिय, मिलनसार, जूझारू, खुशमिजाज, ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर ।न किसी से गिलवा न शिकायत ।अपने ही धुन में मतवाला ,जिंदादिल इंसान थे ।जहाँ वे होते थे ,हँसी-खुशी का माहौल अपने-आप बन जाता था।खूब हँसी-मजाक होती थी।हमारा परिवार, समाज और खासकर हमने अनमोल रत्न को खो दिया है जिसकी पूर्ति संभव नहीं है।ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे एवं उनके वारिस को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे ।हमें तो इतना करना ही होगा कि उनके इस असामयिक निधन से बच्चों को अभिभावक की कमी महसूस नहीं हो।बहुत सारी बातें हैं उनके बारे में, पर भरे दिल व नम आँखें आगे अभी लिखने की इजाज़त नहीं दे रही है।ईश्वर की कृपा हुई तो भविष्य में उनके साथ बिताए गए अविस्मरणीय पल कै लिपिबद्ध कर सकूं।ऊँ शांति😢

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