हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से🙏

मौन ब्रत
हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से🙏
हमारे पूज्य गुरुदेव के अनुसार विश्व का एकमात्र धर्म सनातन वैदिक(हिन्दू)धर्म है, जिसमें विश्व कल्याण निहित है ।सनातन वैदिक संस्कृति में सत्य ब्रत,सदाचार ब्रत,संयम ब्रत,आस्तेय ब्रत,एकादशी ब्रत व प्रदोष ब्रत आदि बहुत से ब्रत हैं, परन्तु मौनव्रत अपने आप मे एक अनूठा ब्रत है।इस ब्रत का प्रभाव दीर्घगामी होता है।इस ब्रत का पालन समयानुसार किसी भी दिन ,तिथि व क्षण से किया जा सकता है।अपनी इच्छाओं व समय की मर्यादाओं के अंदर व उनसे बंधकर किया जा सकता है ।योगशास्त्र कहता है कि जो मनुष्य शरीर रूपी पिंड को बराबर जानता है उस मनुष्य को समष्टि रूप ब्रह्मांड जानना मुश्किल नहीं है।शरीर में चार वाणी है।जैसे कि परावाणी ,नाभि (टुण्डी)मे,पश्यन्ति वाणी, छाती मे, मध्यमावाणी कण्ड (गले मे) और बैखरी वाणी मुँह मे है।शब्द की उत्पत्ति परावाणी मे होती है परंतु, जब शब्द स्थूल रूप धारण करता है, तब मुँह मे रही हुई वैखरी वाणी द्वारा बाहर निकलता है।
मौन से संकल्प शक्ति की वृद्धि तथा वाणी के आवेगों पर नियंत्रण होता है ।मौन आंतरिक तप है इसलिए यह आंतरिक गहराइयों तक ले जाता है।मौन के क्षणों में आन्तरिक जगत के नवीन रहस्य उद्घाटित होते हैं ।वाणी का अपव्यय रोक कर मानसिक संकल्प के द्वारा आन्तरिक शक्तियों के क्षय को रोकना परम मौन को उपलब्ध होना है।
मौन रहने के फायदे
1,दिमाग तेज काम करता है।अगर दिन मे कुछ देर शांत माहौल में शांत बैठते हैं तो उस वक्त केवल एक ही जगह पर दिमाग लगता है और कहीं भी ध्यान भी नहीं। भटकता।

  1. तनाव दूर होता है।
  2. ऊर्जा बढती है ।
  3. बातचीत बेहतर होती है।
    5.कुछ गलत (दुर्वचन)कहने से बचते हैं।
  4. मानसिक शांति।🙏🙏
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