हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से🙏

गुरू कृपा ही केवलम्
जैसे प्रभु हमें दिखाई नहीं देते ,ठीक वैसे ही जो हम “हरिनाम”लेते हैं उसका प्रभाव हमें तुरंत दिखाई नहीं देता ,बल्कि समय आने पर महसूस जरूर होता है।
“हरिनाम”लेने से हमारी “अंतरात्मा”की सुरक्षा होती है, जिसे इस कलियुग के किसी भी तरह का कोई पाप हमारी “अंतरात्मा”को छू नहीं सकते और हम बुरे कर्मों से बच जाते हैं।
भवसागर यात्रा निश्कलंक पूर्ण करने के लिए जब भी जहां भी ,जैसे भी स्थिति मे “हरिनाम”ले सकते हैं।
पतझड़ होता है तो तभी वृक्षों पर हरी कोपलें फूटती हैं और सूर्यास्त होता है, तो तभी अंधकार के बाद एक नया सवेरा भी जन्म लेता है ।पतझड़ होता है ताकि हरियाली छा सके एवं अंधकार होता है ताकि अरूणोदय की लालिमा का आनंद हम सबको प्राप्त हो सके ।जीवन भी कुछ इस तरह का ही है।यहाँ विसर्जन के साथ ही सृजन जुडा हुआ है।
हमारे दुःखों का प्रमुख कारण यह भी है कि हम जीवन को केवल एक दृष्टि से देखते हैं ।हम जीवन को सूर्यास्त की दृष्टि से तो देखते हैं पर सूर्योदय की दृष्टि से नहीं देख पाते।परमात्मा से शिकायत मत किया करो क्यूंकि वो हमसे बेहतर इस बात को जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा हो सकता है।
उस ईश्वर ने आपकी झोली खाली की है तो चिंता मत करना क्यूंकि शायद वह पहले से कुछ बेहतर उसमें डालना चाहते हैं ।सुख और दुख जीवन रूपी रथ के दो पहिये हैं।सुख के बिना दुख का कोई अस्तित्व नहीं तो दुख के बिना सुख का कोई महत्व नहीं।इसलिए दुख आने पर धैर्य के साथ प्रभु नाम का आश्रय लेकर इस विश्वास के साथ प्रतीक्षा करो कि प्रकाश भी नहीं टिका तो भला अंधकार कैसे टिक सकता है?

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