🙏

हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से 🙏
1.अपने ईर्द-गिर्द माहौल/वातावरण को शुद्ध, पवित्र, शांत और खुशनुमा रखें
2.जैसा अन्न, वैसा मन।जो भी अन्न ग्रहण करें वह शास्त्र-सम्मत और सात्विक होने चाहिए।राजसी एवं तामसी भोजन से बचें।भोजन को दवाई समझें।
3.सदा रहें सतर्क, व्यस्त, सावधान एवं प्रसन्न।
4.छोटा सा पाप,छोटीसी भूल,छोटीसी बीमारी, छोटीसी चिंगारी को कभी छोटा मत समझें।भविष्य में यही भयंकर रूप धारण कर लेते हैं।
5.किसी भी विपत्ति मे गुरू/ईश्वर के प्रति अश्रद्धा मन मे न लावें।
6.यदि कोई काम नहीं हो तो अच्छे साहित्यों का अध्ययन करें।
7.सुबह/शाम एकांत मे करूण भाव से प्रार्थना करें।🙏

Advertisement