एक अच्छे मिलनसार, मददगार शख्सियत की जीवन दृष्टि 🙏मृत्यु तो अटल है, लेकिन एक अच्छे मिलनसार, मददगार शख्सियत की असामयिक मृत्यु परिवार के साथ पूरे समाज को झकझोर कर रख देती है।आज भी किसी परिचित के अस्वस्थ होने पर एक अन्जान आशंका से मन घिर जाता है।वे मददगार शख्सियत कानाम-परिमल किशोर सिन्हा, प्यार से लोग बिट्टू कहकर पुकारते थे।पिता-स्व.ब्रजनंदन प्रसादमाता-स्व.मालती देवीशिक्षा-बी.काम.आनर्स, एम.बी.ए.मूल रूप से बेगूसराय, सनहा ग्राम निवासी उनका जन्म, लालन-पालन,कायस्थ टोला, केशोपुर, जमालपुर मे हुआ था।बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे ।पिता रेलवे मे गार्ड थे।माता देवभक्त प्रेम की मूर्ति, गृहिणी थी।विरासत में माता-पिता एवं परिवार के अच्छे संस्कारों एवं अच्छी परवरिश के कारण उन्हें उच्च कोटि की सोच मिली ।परिवार के सभी सदस्यों ,मित्रों के वे चहेते थे ।कुछ बहने उन्हें प्रेम से बिट्ठला कहकर पुकारती थी ।रेलवे हाई स्कूल, जमालपुर से स्कूली शिक्षा प्राप्त की।इंटरमीडिएट करने के बाद उनका रूझान हिंदी साहित्य की ओर मुड गया ।उनके बडे भैया प्रोफेसर डाक्टर कमल किशोर सिन्हा (झूलन भैया)उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने आइ,आइ,टी,प्रवेश हेतु फार्म लाकर दिया था ,पर उस समय उनकी रूचि हिंदी-साहित्य के प्रति इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने फार्म देखा तक नहीं।वे हिंदी-साहित्य के इतने उत्सुक पाठक थे कि कई काव्य, महाकाव्य उन्हें कंठाग्र थे ।साहित्य मे इतने रम गए कि वे भूल गए कि उन्हें अपनी भविष्य की आजीविका के लिए क्या करना चाहिए।तब उनके पिताजी जबरन उन्हें पटना. लाकर पटना विश्वविद्यालय में बी.काम.आनर्स मे दाखिला करा दिया जहाँ से वे उच्च श्रेणी में उतीर्ण हुए।राँची से एम.बी.ए. डिग्री हासिल करने के बाद भारत सरकार के उपक्रम मे उच्च पद पर पदासीन हुए। उनका विवाह श्री अरूण भूषण की पुत्री अनामिका भूषण से हुआ ।उनके दो छोटे छोटे बच्चे हैं ।अपने दायित्वों के निर्वहन के दौरान ज्यादा समय भोपाल एवं दिल्ली में व्यतीत किया ।उनकी उदारता अद्भुत थी।उनको दूसरों को मदद करने के अलावा अपना कोई शौक नहीं था ।वे अत्यंत उत्साही, कर्मठ,सौम्य, सक्रिय, मिलनसार, जूझारू, खुशमिजाज, ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर शख्सियत थेक्ष।न किसी से गिलवा न किसी से शिकायत।अपने ही धुन में मतवाला, जिंदादिल इंसान थे।जहाँ वे होते थे हँसी-खुशी का माहौल अपने आप बन जाता था।खूब हँसी-मजाक होती थी ।कहते हैं न इस दुनिया में जो आया है वो एक-न-एक दिन जरूर जायेगा ।बस फर्क इतना है कि कोई अपनी छाप छोड़कर चले जाते हैं, कोई कुछ नहीं।वे वर्ष 2020 से कारोना से संक्रमित थे।उम्र सीमा से कम होने के कारण टीका प्राप्त करने मे असफल रहे ।कारोना के कारण दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हुए ।अंतिम दिनों में राजीव गांधी सुपरस्पेशलिटी अस्पताल मे भर्ती थे।डाक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद 2 मई 2021 को उनका देहांत हो गया।हमारे द्वारा उन्हें स्वर्गीय नहीं माना गया है, क्यूंकि ऐसे मिलनसार, मददगार शख्सियत कभी मरते नहीं ।वे हमेशा हमारी दिलों में रहेंगे।हद-से-हद मौत ऐसे शख्सियत की जिस्म मिटा सकती है ।किन शब्दों में अपनी संवेदना प्रकट करें ।आँखों के आँसू सूखने का नाम नहीं ले रहे हैं ।पूरे परिवार-समाज का एक अनमोल रत्न-धरोहर चला गया ।बडे भाइयों ने लक्ष्मण जैसा भाई,भाभियो़ ने लक्ष्मण जैसा देवर खो दिया है ।बहनों के आँखों का सितारा चला गया है ।दो छोटे छोटे बच्चे जिनके सर से पिता का साया उठ गया, उसका दर्द है, उसे कैसे नकारूँ?दिल से भावपूर्ण श्रद्धांजलि💐

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