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गुरू कृपा ही केवलम् 🙏
मन कभी भी खाली नहीं बैठ सकता।कुछ ना कुछ करना इसका स्वभाव है ।इसे काम चाहिए ।अच्छा काम करने को नहीं मिला तो बुरे की ओर भागेगा।
मन जहाँ खाली हुआ, बस उपद्रव प्रारंभ कर देगा।लडाई-झगड़ा, निंदा-आलोचना, विषय-विलास ,ऐसी कई गलत जगह पर यह आपको ले जायेगा, जहाँ पतन निश्चित है।
पतन एक जन्म का हो तो कोई बात नहीं ।ऐसे कई अपराध और गलत कर्म करा देता है ,जिसके प्रारब्ध फल को भुगतने के लिए कई कई जन्म भी कम पड जाते हैं ।
मन को सृजनात्मक और रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखिये।इससे आपके आध्यात्मिक विकास के साथ भौतिक विकास भी होगा।मन सही दिशा में लग गया तो जीवन मस्त (आनंदमय)हो जायेगा ,नहीं तो जीवन अस्त-व्यस्त, तनावग्रस्त, और अपसेट होने मे देर नहीं लगेगी।
जीवन में भगवतप्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।जो लक्ष्य बिना बनाए जीवन व्यतीत कर रहे हैं ,उनका जीवन तो जा रहा है, और मौत भी आयेगी ही ,इसलिए जीवन में लक्ष्य पहले ही बना लेना चाहिए।
लक्ष्य बनाने पर बहुत लाभ होता है।अगर लक्ष्य बन गया तो वह खाली नहीं जायेगा ,कमी रह जायेगी तो तो योगभ्रष्ट हो जाओगे।
लक्ष्य बनाने पर हमारा साधन, उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए होता है।समय बर्बाद नहीं होता है।समय सार्थक होने पर स्वाभाविक वृत्तियाँ स्वतः सही हो जाती है ।अवगुण स्वतः दूर होते हैं ।संसार का खिंचाव कम होता है ।आस्तिक भाव बढता है।अगर जीवन में यह परिवर्तन दीख नहीं पड रहा है तो लक्ष्य नहीं बना है, साधन हाथ नहीं लगा है ।साधु,गुरू, शास्त्र का संगत नहीं मिला है।
हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से।🙏🙏

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