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गुरू कृपा ही केवलम्🌷
जब किसी तालाब में मोटी काई लग जाती है ,तब पानी दिखाई नहीं देता है ,चारों तरफ़ हरी-हरी काई ही दिखाई देती है।हाथ से हटाओ तो वहाँ से हाथ हटाते ही काई फिर से पानी को ढँक लेता है।वही दशा मन की है।मन मे दुनिया के छल-प्रपंच ,कलह -कल्पना और भ्रम जनित नाना प्रकार के विकारों की काई छाई हुई है।जब सत्-सज्जनों की संगति होती है तो लगता है कि मन की काई साफ हो गई है।जैसे ही वहाँ से अलग हुए ,फिर छल-प्रपंच एवं विकारों की काई मन में छा जाती है ।बडी विकट है, यह काई बारंबार हटाने पर भी मन से हटने का नाम नहीं लेती है।बस मन में छाई हुई काई को हटाते रहें, हटाते रहें और दिन-रात निरंतर सावधानी रखें ताकि मन में फिर से कोई काई जमने न पाये ।
हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से।🙏

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