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गुरू कृपा ही केवलम्🌷
“प्रेम”
प्रेम मे अद्भुत शक्ति व सामर्थ्य है।अगर उस परमात्मा को झुकाने की सामर्थ्य किसी मे है तो वो मात्र प्रेम ही है ।चाहे केवट,शबरी, हनुमानजी, सुग्रीव, विभीषण, अर्जुन, गोपियां, बिदुर जी,सुदामा जी के आगे हो,प्रेम में वशीभूत होकर कितनी ही बार उस प्रभु को झुकते हुए देखा गया है ।
प्रभु प्रेम में झुके हैं, इसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि प्रेम में ही किसी को झुकाने की शक्ति व सामर्थ्य है।और जो प्रेम स्वयं भगवान को झुका सकता है, वह इंसान को क्यूँ नहीं झुका सकता है ? निःसंदेह वह इंसानों को भी झुका सकता है।प्रेम में झुकते हुए प्रभु ने यही सीख दी है कि अगर आप सामने वाले से प्रेमपूर्ण व्यवहार करते हैं तो निःसंदेह आप उसके ऊपर अपना आधिपत्य भी जमा लेते हैं।
किसी को जीतना चाहते है तो उसे प्रेम से जीतिए।किसी को डराकर, धमकाकर और बल प्रयोग से कुछ समय के लिए ही जीता जा सकता है।प्रेम वो शहद है जो संबधों को मधुर, मीठा बनाता है।मधुर संबंध पारिवारिक खुशहाली को जन्म देते हैं और पारिवारिक खुशहाली एक सफल जीवन की नींव है।
हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से🙏

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