गुरू कृपा ही केवलम्🌷
“प्रसन्नता”
प्रसन्नता जीवन का सौंदर्य है।चित्त की अप्रसन्नता मे चेहरे का सौंदर्य कोई मायने नहीं रखता है।जीवन तो वही सुंदर है, जिसमें चेहरे पर खूबसूरती हो या नहीं हो मगर हृदय में प्रसन्नता अवश्य होनी चाहिए ।महत्वपूर्ण ये नहीं कि आप कितने सुंदर हैं, महत्वपूर्ण ये है कि आप कितने प्रसन्न हैं।
प्रसन्नचित व्यक्ति सकारात्मक सोच का पर्याय है।व्यक्ति की सोच जितनी सकारात्मक होगी उसका मन उतना ही प्रसन्न भी रहेगा ।सकारात्मक विचारों से ही जीवन में सकारात्मक नजरिये का निर्माण संभव हो पाता है और सकारात्मक विचार सदैव श्रेष्ठ संगत से प्राप्त होते हैं।आपके अंतःकरण की प्रसन्नता निःसंदेह आपके संगत पर भी निर्भर करती है ।
जीवन में प्रायः यही पाया गया है कि जिनके पास श्रेष्ठ विचारों वाले व्यक्तियों का संगत रहा वो पांडवों की तरह विपरीत परिस्थितियों में भी प्रसन्नतापूर्वक जी सके ।जीवन में सदैव श्रेष्ठ का संगत करें ताकि उनसे प्राप्त प्रेरक विचार आपके जीवन परिवर्तन का कारण बन सके और सुविचारों की महक से पुष्प की तरह आपका जीवन भी प्रसन्न एवं सौंदर्यपूर्ण बन सके।
हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से🙏

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