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हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से
“संगीत “
इतिहास संक्षिप्त मे ः संगीत वैदिक काल से आज तक ,अनेक उतार-चढाव झेलते हुए हमारे समक्ष उपस्थित है, वह भी अत्यंत विकसित एवं विस्तृत रूप में।विभिन्न शैलियों तथा स्वर संसाधनों मे संगीत वैदिक काल से वर्तमान में पाया जाता है, जो भारतीय संस्कृति व पद्धति की गरिमा है ।
परिभाषा ः “संगीत रत्नाकर” नामक ग्रंथ मे निम्नलिखित श्लोक से संगीत की परिभाषा स्पष्ट होती है।
” गीतं वाद्दं तथा नृत्यं त्रयं संगीतमुच्यते।
नृत्यं वाद्दानुगं प्रोक्तं वाद्दं गीतानुवृत्ति च “।।
अर्थात् गायन,वादन तथा नृत्य इन तीनों कलाओं के मेल को संगीत कहते हैं।
संगीत एक उत्कृष्ट ललित कला है, और इसका मुख्य आधार है- नाद अथवा ध्वनि ।इसलिए इसे “नाद ब्रह्म ” कहा जाता है।संगीत को हृदय की भावनाओं को प्रकट करने की भाषा मानी जाती है ।संगीत कला का प्राणि मात्र से अत्यंत ही घनिष्ठ संबंध है।यहाँ तक कि पशु-पक्षी भी इस पर न्योछावर होते हैं।
संगीत एक ऐसी कला है, जिसे हर मनुष्य लगभग किसी न किसी रूप में इसे अपना ही लेता है ।यदि किसी को गायन मे रूचि है, तो वह गाने में, वादन मे रूचि है तो विभिन्न वाद्दयंत्र बजाने मे और किसी को नर्तन मे रूचि है ,तो वह नृत्य के रूप में इसे अपनाता ही है।इसके अलावा अधिकांश लोगों को संगीत सुनने और सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने में भी उतना ही आनंद आता है जितना कि एक गायक को गाने में।जिन्हें संगीत के किसी रूप से कोई रूचि नहीं है, वह मनुष्य जाति मे अपवाद है।संगीत एक भावना है, और जो मनुष्य भावुक सही मे नहीं है, वह अपवाद तो है ही और ऐसे लोग अपने को कलाकार या संगीतज्ञ कहते हैं तो वे कभी भी संगीत के ऊँचाइयों को छू नहीं सकते।
संगीत सीखना ः सर्वप्रथम यह समझ लेना आवश्यक है कि संगीत का स्वरूप चाहे जो भी हो,उसकी नींव शास्त्रीय संगीत ही है।
भाव संगीत के अनेक रूप भजन या गजल, लोकगीत या चित्रपट संगीत इत्यादि हैं।इन्हें सीखने हेतु कुछ रागों की जानकारी आवश्यक है।अलंकारों का पूरा अभ्यास, कुछ रागों के तान,द आलाप इत्यादि को नियमित रूप से स्मरण करना होगा।
शास्त्रीय संगीत सीखने में अनेक नियमों के अन्तर्गत रहना पडता है।इनकी कुछ सीमाएं होती हैं। उन सीमाओं से बाहर जाने पर रागों के नियमों का उल्लंघन माना जाता है।लेकिन ,भाव संगीत में ऐसी सीमाएं नहीं होती हैं। किसी भजन या गजल मे हम एक राग की सीमा से बाहर भी जा सकते हैं ।भाव संगीत मे शब्दों के भाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जबकि शास्त्रीय संगीत मे रागों के नियम पर।
आपका दिन शुभ हो।🌷