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हमारे पूज्य गुरुदेव के सौजन्य से🙏
देवत्व आपके जीवन में घटना चाहिए।देवता वे नहीं जिन्होंने स्वर्ग में घर बनाया है, अपितु वे हैं जिन्होंने घर को ही स्वर्ग बनाया है।सदगुण, सदाचार और सद्चरित्रों का जीवन में प्रवेश ही जीवन में दैवत्व घटना है और इन्हीं गुणों का ह्रास ही जीवन से दैवत्व की कमी होना है।
महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप विशिष्ट बनें अपितु यह है कि आप शिष्ट बनें ।हमें महान् बनने का नहीं अपितु एक अच्छे इंसान बनने का प्रयास करना चाहिए।जहाँ एक अच्छे और सच्चे इंसान का निर्माण होता है महान् बनने की प्रक्रिया भी वहीं से प्रारंभ होती है।
महान् बनने के लिए अगर कोई शर्त है तै वह मात्र इतनी कि पहले एक इंसान बना जाये। मनुष्य जन्म मिलना कोई बडी बात नहीं है, अपितु मनुष्यता का जन्म होना बडी और दुर्लभ बात है।
कभी-कभी भक्ति मार्ग मे कई तरह की बाधाएं आती रहती है तो इससे सच्चे भक्तों को नहीं घबराना चाहिए, ये तो प्रभु की लीला है कि वे समय समय पर अपने भक्तों की धैर्यता की परीक्षा लेते रहते हैं, और जो परीक्षा में सफल हो गए तो समझिए कि उनकी भक्ति श्री हरि के प्रति पक्की है और जो उनकी परीक्षा में सफल हो गए तो समझो उनकी भके श्री हरि के प्रति पक्की है और जो इन बाधाओं से घबरा गए तो उनमें अभी आस्था और विश्वास की कमी है, जब विश्वास और श्रद्धा श्री नारायण के प्रति अटूट हो जाये और उनके चरणों में पूर्णरूपेण समर्पण का भाव आ जाए तो समझ लेना चाहिए कि भक्ति सही ढंग से हो रही है।

मेरा मुझमें कुछ नाहीं, जो कुछ है सो तोर ।
तेरा तुझको सौंपते, क्या लागत है मोर ।।
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