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अपने पूज्य पापाजी के पुण्यतिथि 24 जून पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
जहाँ तक हमें अपने पूज्य पापाजी का स्मरण है, यदि उनके जीवन पर प्रकाश डाला जाये तो एक किताब से कम नहीं होगी।पापाजी अपने कर्तव्यों खासकर सरकारी सेवा में इतने व्यस्त रहते थे कि उनके पास अपने परिवार-बच्चों के लिए कम समय ही दे पाते थे।इसका अर्थ यह नहीं था कि उन्हें अपने परिवार-बच्चों से प्रेम नहीं रहा होगा।हम सारे भाई-बहन अपनी माँ से ही चिपके रहते थे एवं पापाजी से सहमे हुए रहते थे जबकि पापाजी ने शायद ही किसी बच्चों को थप्पड़ भी मारा हो ।हमारी माँ पुलिस सेवा की बेटी कडी अनुशासन वाली महिला थी। हम सारे भाई-बहन अपने दुख-सुख अपनी भावनाओं का शेयर माँ से ही करते थे।जब हम युवा हुए तो सोचते थे कि अपने दुख-सुख,भावनाओं को पापाजी को शेयर करेंगे और उनकी चिंताओं को आपस मे साझा करेंगे ,पर ऐसा करने की कभी हिम्मत नहीं हुई।यह दूरी संभवतः अदब,लिहाज, संस्कार या फिर Generation Gap के कारण बढती चली गई।कभी कभी हमारा मन होता था कि इन दूरियों को लाँघकर अपने पापाजी को गले लगा कर कहें कि पापाजी आपकी तबियत कैसी है?आपको किसी चीज की जरुरत तो नहीं? जैसा प्यार अपनी माँ से करते थे वैसा ही प्रेम पापाजी को व्यक्त करना चाहते थे, पर यह हो न सका।समय के साथ अदब,लिहाज की दीवारें या परिस्थितियां इतनी कठोर होती गई कि इन दीवारों का पार करना मुश्किल सा होता गया ।यह हमारा सौभाग्य हुआ कि जब पापाजी गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हुए तो हमारे द्वारा प्रेम का छोटा सा इजहार अपना खून उन्हें समर्पित कर किया गया।
माता-पिता सबके पास सदा के लिए नहीं होते हैं ।वे जब खो जाते हैं तब उनकी कमी महसूस होती है।यदि आपके पास अभी भी माता-पिता का साया मौजूद है तो आप सौभाग्यशाली हैं।यथासंभव इस मूल्यवान संबंध को सहेज कर रखें।
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